औरंगाबाद

पिछले 4 वर्षों से हादसों को आमंत्रित कर रहा है सोहरैया गांव के समीप सोन नहर कैनाल का पुल

राजनीतिक एवं प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित ग्रामीण आंदोलन को हो रहे हैं मजबूर

अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट

औरंगाबाद।बिहार की सत्ता अभी जंगलराज और मंगलराज की व्याख्या में लगी हुई है।समस्याएं और विकास की सोच धरातल पर उतारने से पहले ही इसी मकड़जाल में उलझकर रह जा रही है।यही कारण है कि पिछले पांच दशक से कई गांव ऐसे हैं जो एक अदद सड़क और पुल पुलिया की आवश्यकता से महरूम होकर रह गए हैं।

 

बेशक सरकार राज्य की विकास को लेकर अपनी उपलब्धियों को अखबार के पन्नों एवं बड़े बड़े होडिंग के माध्यम से क्यों न दिखाने का प्रयास कर ले लेकिन कई गांव अभी भी ऐसे हैं जो विकास की स्याह हकीकत दिखाने को मजबूर हैं।

 

सरकार के द्वारा विकास के ऐसे ही स्याह हकीकत को प्रस्तुत कर रही है सदर प्रखंड के फैशन थाना क्षेत्र के सोहरैया गांव स्थित नहर कैनाल की पुल।इस पुल से वाहनों का आवागमन पिछले चार सालों से बंद है।क्योंकि यह पुल बीच में ही टूट गई है जिसके कारण वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। पुल निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने कई बार विधायक और सांसद के साथ साथ अधिकारियों का भी ध्यान आकृष्ट कराया।मगर ग्रामीणों के प्रयास नक्कारखाने में तूती की आवाज साबित हुई।

 

इस पुल से दिल मोहम्मद गंज, दिल मोहम्मद गंज बिगहा, पोखराहा, सिमरा, जगदीशपुर, नोरौला, फेसरा सहित एक दर्जन गण जुड़े हुए है और पुल के टूटने से इन सभी गांवों के ग्रामीणों को रफीगंज एवं गोह जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।इतना ही नहीं पुल के टूटने से विद्यालयों की वाहन दो किलोमीटर पहले ही रुक जाती है जिसके कारण बच्चों को उतनी दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है।स्थिति यह है कि बच्चो को पुल पार करने के दौरान बराबर खतरा बना हुआ है।

 

राजनीतिक एवं प्रशासनिक उदासीनता से ग्रामीण परेशान हैं। स्थानीय ग्रामीण धर्मेंद्र कुमार, मनोज कुमार, पिंटू कुमार, अमरजीत कुमार, सुजीत कुमार ने बताया कि पिछले चार सालों से ग्रामीण इस समस्या से निजात पाने की कोशिश में लगे हुए हैं।यदि उदासीनता का थी आलम रहा तो आने वाले दिनों में ग्रामीण सड़क पर उतरकर अपने हक के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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