ब्यूरो रिपोर्ट

तो क्या केंद्र से पशुपति पारस का पत्ता होगा साफ,चिराग के लिए केंद्र देगी उनकी कुर्बानी?

केंद्र से चिराग को मिला मंत्री बनने का आमंत्रण तो बिहार को लेकर चिराग ने भी रख दी शर्त

ब्यूरो रिपोर्ट। बिहार में राजनीतिक उठापटक के पास भारतीय जनता पार्टी को बिहार में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए जब कोई क्षेत्रीय पार्टी हाथ मिलाने को तैयार नहीं हुई तो केंद्र ने एक बार फिर अपने पुराने साथी चिराग पासवान को याद किया और केंद्र में मंत्री बनने का ऑफर भी दे दिया। लेकिन नीतीश कुमार के साथ आकर बीजेपी ने जिस प्रकार से चिराग पासवान के साथ छल किया उसको वे भूले नहीं है।

 

ऐसी स्थिति में चिराग पासवान ने भी बीजेपी के सामने मंत्री बनने से पूर्व 5 ऐसी शर्त रख दी जिसको लेकर बीजेपी पेशोपेश में पड़ गई। हालांकि चिराग पासवान के चार शर्त मान लिए जाने की सूचना मिल रही है लेकिन पांचवा शर्त पशुपति पारस को केंद्र के मंत्रिमंडल से हटाए जाने पर अभी बात नहीं बनी है।

 

गौरतलब है कि नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होकर महागठबंधन के साथ जाने के बाद से बिहार में बीजेपी अकेली हो गई है। JDU के नुकसान की काफी हद तक भरपाई रामविलास पासवान की पार्टी और उनके बेटे चिराग पासवान ही कर सकते हैं। पुराने सहयोगी होने की वजह से चिराग को एनडीए में आने से कोई परहेज नहीं है। लेकिन इतना तो तय है कि एलजेपी से दो मंत्रियों को जगह नहीं मिलनेवाली। वैसे भी बीजेपी को पता है कि असली एलजेपी चिराग पासवान की है।एलजेपी के समर्थक चिराग को छोड़कर उनके चाचा पशुपति पारस के साथ जानेवाले नहीं हैं।

 

पार्टी सूत्रों के अनुसार चिराग पासवान ने जिन शर्तों को भाजपा के सामने रखा था वो आज भी कायम हैं। 95 प्रतिशत बातों को भाजपा की ओर से मान लिया गया है। सिर्फ 5 प्रतिशत ही बाकी है। पेंच सिर्फ NDA गठबंधन में शामिल और केंद्रीय मंत्री चाचा पशुपति कुमार पारस को लेकर फंसा है। इन्हें इस गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखाना ही होगा क्योंकि, इन्होंने न सिर्फ लोजपा को तोड़ा, बल्कि परिवार का भी बंटवारा कर दिया।

 

दूसरी शर्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू से हमेशा के लिए नाता तोड़ने को लेकर है। चिराग पासवान को गठबंधन में शामिल कराने की पहल भाजपा और केंद्र सरकार की तरफ से ही शुरू की गई है। चुनाव को ध्यान में रखते हुए हर पार्टी अपने हिसाब से प्लान तैयार करती है।जिस हिसाब से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पलटी मारी है, उस हिसाब से गठबंधन का स्वरूप और बड़ा होगा। यही कारण है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह बिहार दौरे पर आने वाले हैं।चुनाव के नजदीक आने पर स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सी पार्टी, किस तरफ रहती है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिराग पासवान के आदर्श रहे हैं।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दबाव में भाजपा का जो रवैया पिछले दिनों रहा, उससे चिराग थोडा नाराज जरूर थे। NDA नीतीश कुमार के चले जाने के बाद फिर से भाजपा की आंख खुली है तो चिराग उसका सहयोग करने के लिए तैयार है। लोक जनशक्ति पार्टी एनडीए का प्रमुख हिस्सा रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में लोजपा 6 सीटों पर जीती थी। वोट 8.02 फीसदी मिला था। रामविलास पासवान बिहार के 6% पासवान वोटों के साथ दलितों के सबसे बड़े चेहरे थे। 8 अक्टूबर 2020 को उनके निधन हो गया। इसी दौरान बिहार में विधानसभा चुनाव शुरू हो गए। एनडीए से अलग होकर चिराग पासवान ने चुनाव लड़ा। उन्होंने सीधे घोषणा कर दी कि वे नीतीश के साथ चुनाव नहीं लड़ सकते।

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