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फ़िल्म KGF की कहानी का हीरो रॉकी भाई क्या रियल दुनिया में भी था? क्लिक करके पढिये पाउली गैंग की असली कहानी!

नीचे पढिये अपनी माँ के नाम पर गैंग चलाने वाले रॉउडी की कहानी, जिसे देखते ही गोली मारने का फरमान जारी किया गया था।

लोकप्रिय कन्नड़ फिल्म केजीएफ का दूसरा भाग (KGF Chapter 2) रिलीज होने के बाद से ही बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रहा है। कोरोना की वजह से देरी से रिलीज हुई यह फ़िल्म चार वर्ष पहले आयी KGF Chapter 1 का सीक्वल है। क्या आपको पता है इस फ़िल्म में रॉकी भाई का रोल निभा रहे सुपर स्टार यश का कैरेक्टर एक रीयल लाइफ कैरेक्टर रॉउडी थंगम से बिल्कुल मिलता जुलता है।

न्यूज18 की एक रिपोर्ट्स की मानें तो फ़िल्म मेकर्स ने इसे रॉउडी थंगम की कहानी बताने से इंकार किया है। उनके अनुसार फ़िल्म के लेखक डायरेक्टर प्रशांत नील को रॉउडी थंगम के कहानी की कोई जानकारी ही नहीं है।

कौन था राउडी थंगम?

थंगम नब्बे की दशक में लोकप्रियता के मामले में वीरप्पन का दूसरा नाम माना जाता था। उन्हें वीरप्पन जूनियर भी कहा जाता था। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, गोली मारने से कुछ दिन पहले उसके नाम पर 42 अपराध थे। अपनी मृत्यु के दो दिन पहले थंगम ने 1.5 लाख रुपये के गहने लूट लिए थे। थंगम को केजीएफ क्षेत्र में स्थानीय लोगों का समर्थन प्राप्त था। स्थानीय लोगों द्वारा उन्हें ‘रॉबिन हुड’ माना जाता था। सूत्रों के अनुसार, डकैती को केजीएफ पुलिस के लिए शर्मिंदगी का विषय माना जा रहा था। इसी वजह से उसे देखते ही गोली मारने का आदेश दिया गया था।

27 दिसम्बर 1997 को थंगम एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। अपनी मृत्यु के समय, थंगम केवल 25 वर्ष का था।

रॉकी भाई के कैरेक्टर को रॉउडी थंगम से क्यों जोड़ा जा रहा है?

वास्तविक जीवन में, थंगम की माँ, पाउली, थंगम के जीवन में इस कदर एक मजबूत व्यक्ति थीं कि उनके गिरोह को ‘पाउली का गिरोह’ कहा जाता था। फ़िल्म में भी रॉकी की कहानी के आसपास उसकी माँ को चित्रित किया गया है।

फिल्म के एक अन्य दृश्य में, भारत के प्रधान मंत्री रॉकी को सलाखों के पीछे होने का आदेश देते हैं। यह उस घटना से काफी मिलता-जुलता है जहां थंगम के खिलाफ देखते ही गोली मारने का आदेश दिया गया था। फिल्म में अधीरा, गरुड़, सूर्यवर्धन और अन्य जैसे पात्र केजीएफ पर शासन करने वाले असली गैंगस्टरों से प्रेरित हो सकते हैं।

जिस तरह रॉकी कोलार गोल्ड फील्ड में उतरने के बाद स्थानीय लोगों का समर्थन प्राप्त होता है, उसी तरह थंगम को भी स्थानीय लोगों का भारी समर्थन प्राप्त हुआ, भले ही उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगे थे। खबर है कि थंगम का परिवार खदानों में भी काम करता था।

आपको बता दें कि कोलार गोल्ड फील्ड (KGF) भारत (कर्नाटक राज्य) में एक वास्तविक सोने की खान थी जहां से नब्बे की दशक में पूरे देश का लगभग 95% सोना निकाला जाता था। बाद में खान की गहराई बढ़ने, प्रदूषण और अन्य प्रशासनिक वजहों से इसे बंद कर दिया गया।

ऐसा कहा जाता है कि फ़िल्म में रॉकी भाई की तरह ही रॉउडी थंगम भी लूट से प्राप्त रकम और सोने के कुछ हिस्सों को गरीबों में बांट दिया करता था जिसकी वजह से उसे स्थानीय लोगों का समर्थन प्राप्त था।

थंगम के परिवार ने फ़िल्म KGF पर कईं बार जताई है नाराजगी

पहले भाग की रिलीज़ के बाद, थंगम के परिवार ने दूसरे भाग की शूटिंग पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की क्योंकि उन्हें लगा कि थंगम को एक नकारात्मक रोशनी में चित्रित किया गया है। हालांकि, फिल्म के निर्देशक प्रशांत नील ने ऐसी किसी भी अफवाह का खंडन किया था। अभी दूसरे भाग की रिलीज के बाद थंगम कि मां ने बिना परमिशन लिए फ़िल्म बनाने का फिर से आरोप लगाया है।

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