स्वास्थ्य

स्वास्थ्य जागरूकता के ऐतिहासिक पहल, विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम

अभय कुमार बीआरजी औरंगाबाद

औरंगाबाद। किसी भी राष्ट्र के उत्थान में उनके नागरिकों के बेहतर स्वास्थ्य स्थिति का होना एक आवश्यक घटक होता है। इसके अभाव में वहां के नागरिकों का शारीरिक, आर्थिक व सामाजिक स्थिति प्रभावित होती है। ऐसे में भारत जैसे विशालकाय जनसंख्या वाले देश में 130 करोड़ लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करना, किसी भी सरकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।

 

इसी चुनौती को संज्ञान में लेते हुए भारत सरकार के सलाहकार समिति ने सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता पहल की वकालत की है। इस संदर्भ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम को शुरू किया है, जो 14 अप्रैल, 2018 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए आयुष्मान भारत योजना के विद्यालय स्वास्थ्य घटक के रूप में कक्षा 6-12 के बच्चों के लिए है। यह कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवम परिवार कल्याण मंत्रालय का विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए एक संयुक्त पहल है। इस कार्यक्रम में यूनिसेफ की इकाई यूएनएफपीए, प्लान इंडिया के साथ मिलकर डेवलपमेंट पार्टनर के तौर पर कार्य कर रही है।

 

इस स्वास्थ्य कार्यक्रम को विद्यालयी बच्चों के लिए शुरू करने का आधार इस प्रकार है- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) स्वास्थ्य को केवल रोग की अनुपस्थिति न समझकर सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक कल्याण की अवस्था के रूप में परिभाषित करती है। इस दृष्टिकोण से स्वास्थ्य सभी उम्र वर्ग के लोगों के लिए आवश्यक है, पर बच्चों एवम किशोर वर्ग के स्वास्थ्य व कल्याण पर निवेश करने से उनके हितार्थ के साथ – साथ उनके आने वाली अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य को ठीक किया जा सकता है।

 

जनगणना 2011 के अनुसार भारत में कुल जनसंख्या का 39% अर्थात् 47.3 करोड़ जनसंख्या (0-18 वर्ष) के बच्चों की है। इनके स्वास्थ्य पर निवेशों का भारत के स्वास्थ्य लक्ष्यों पर केवल तात्कालिक एवम सकारात्मक ही नहीं, बल्कि यह देश को अपनी जनसांख्यिकीय लाभांश को समझने, प्रभावी कार्यप्रणाली तथा समावेशी विकास एवम आर्थिक विकास में सहयोग करने में भी सहायता करता है।

 

इस स्वास्थ्य कार्यक्रम से पहले विद्यालय में कई अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं जिनमें राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, साप्ताहिक फॉलिक एसिड की गोली वितरण, अल्बेंडाजोल की गोली वितरण एवम किशोरियों के लिए मासिक स्वच्छता अभियान इत्यादि। विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत विद्यालय जाने वाले किशोर – किशोरियों के स्वास्थ्य संबंधी 43 प्रकार के स्थितियों की जांच, उपचार एवम मार्गदर्शन तथा उनमें स्वस्थ आदतों का विकास आदि का प्रावधान किया गया है।

कार्यक्रम का उद्देश्य 

1. विद्यालय में बच्चों को स्वास्थ्य और पोषण के बारे में उचित जानकारी प्रदान करना।

2. बच्चों के जीवन में स्वस्थ व्यवहार को बढावा देने के लिए प्रेरित करना।

3. बच्चों और किशोरों में शुरुआत में ही बीमारियों का पता लगाना और उनका इलाज करना, जिनमें कुपोषित और एनीमिक बच्चों की पहचान कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में रेफरल करना भी शामिल है।

4. विद्यालयों में सुरक्षित पेयजल उपयोग एवम पृथक शौचालय निर्माण तथा उपयोग को बढ़ावा देना ।

5 स्वास्थ्य और कल्याण राजदूतों के माध्यम से योग और ध्यान को बढ़ावा देना।

6. लड़कियों में सुरक्षित मासिक धर्म हेतु स्वच्छ प्रथाओं को बढ़ावा देना।

इस प्रकार कार्यक्रम के उद्देश्यों को विद्यालय जानेवाले बच्चों में सूचित कर उन्हें उत्तरदाई एवम स्वस्थ व्यवहारों को विकसित करने वाले ज्ञान को बढ़ाना, सकारात्मक अभिवृति को मन में बिठाकर उनके जीवन कौशल में वृद्धि करना है।

 

कार्यक्रम में संलग्न कर्मियों का प्रशिक्षण कार्य व संबंधित उत्तरदाई इकाई

विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम से संबंधित सम्पूर्ण प्रशिक्षण और संसाधन सामग्री के विकास की प्रक्रिया को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवम प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने शिक्षा विभाग तथा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से किया है। विभिन्न आयुवर्ग के विद्यार्थियों की आवश्यकताओं एवम सरोकारों को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सामग्री को 11 मॉड्यूल में व्यवस्थित किया गया है जो इस प्रकार से हैं –

 

1. स्वस्थ बढ़ना

2. भावनात्मक कल्याण और  मानसिक स्वास्थ्य

3. पारस्परिक संबंध

4. मूल्य और जिम्मेदार

नागरिकता

5. जेंडर समानता

6. पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता

7. पदार्थ के दुरुपयोग की

रोकथाम और प्रबंधन

8. स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा

देना

9. प्रजनन स्वास्थ्य और HIV की

रोकथाम

10. हिंसा और चोटों के खिलाफ

सुरक्षा

11. इंटरनेट और सोशल मीडिया

के सुरक्षित उपयोग को

बढ़ावा देना

 

प्रशिक्षण प्रक्रिया –

👉 राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्य स्वास्थ्य एवम शिक्षा मंत्रालय के द्वारा संयुक्त रूप से सम्पन्न किया जाएगा।

👉 राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक राज्य से चार प्रशिक्षकों जिनमें शिक्षा से दो एवम स्वास्थ्य से दो।

👉 राज्य स्तर पर प्रत्येक जिले से तीन प्रशिक्षक जिनमें शिक्षा से दो तथा स्वास्थ्य से एक।

👉जिला स्तर पर प्रत्येक प्रखंड से तीन प्रशिक्षक जिनमें शिक्षा से दो एवम स्वास्थ्य से एक।

👉 प्रखंड स्तर पर सभी विद्यालयों (कक्षा 6-12) के प्रधानाध्यापकों का दो दिवसीय उन्मुखीकरण एवम उनके विद्यालय के नामित दो – दो नोडल शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण।

 

कार्यक्रम का संचालन –

👉 प्रत्येक विद्यालय से दो शिक्षकों(एक महिला एवम एक पुरुष) को इस कार्यक्रम हेतु नामित किया जायेगा जो स्वास्थ्य आरोग्य दूत (HWA) के रूप में जाने जायेंगे। इन्हें बच्चों में स्वास्थ्य व्यवहार को बढावा देने एवम रोगों के रोकथाम के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा जो हर हफ्ते एक घंटे का कार्यक्रम से संबंधित एक सत्र लेंगे।

 

ये हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर (HWA) कक्षा 6 से 12 में प्रत्येक से दो (छात्र/छात्रा) का चुनाव करेंगे जो स्वास्थ्य और आरोग्य संदेशवाहक (HWM) के रूप में आयोजित सत्र में स्वास्थ्य संवर्धक जानकारी लेकर समाज तक पहुंचाएंगे।

 

विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को स्वास्थ्य व कल्याण दिवस मनाया जाएगा। इस स्वास्थ्य कार्यक्रम का संरक्षण हेतु राज्य, जिला एवम प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य तथा शिक्षा के नोडल अधिकारी रहेंगे। हमारे बिहार राज्य के लिए गौरव की बात है कि यहां के 14 जिलों में यह कार्यक्रम को शुरू किया गया है जिनमें से 5 जिलों में पूरी तरह से प्रशिक्षण समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में 9 जिलों में प्रशिक्षण कार्य जिनमें औरंगाबाद, अररिया, बांका, बेगूसराय, नालंदा, नवादा, मुजफ्फरपुर, खगड़िया एवम शेखपुरा में जारी है।

 

प्रशिक्षण कार्य के दरम्यान होनेवाली कई बाधाएं निकल कर सामने आई जिनमें विभागीय अड़चन, संलग्न कर्मियों का अक्रियता एवम कार्यक्रम में रुचि न लेना तथा इसे धरातल पर लागू करने संबंधी आशंकाएं आदि है। जिले में प्रशिक्षण कार्य का अनुश्रवण करने के दौरान हमें अनुभव प्राप्त हुआ कि उक्त बाधाओं को दूर करने से प्रशिक्षण कार्य प्रभावी ढंग से सम्पन्न होगी एवम कार्यक्रम सफलता की ओर अग्रसर होगी। इसी प्रकार सिलसिलेवार ढंग से प्रशिक्षण कार्य को पूर्ण कर बिहार राज्य के साथ – साथ पूरे देश में इस कार्यक्रम को लागू होना, निःसंदेह ही एक मील का पत्थर साबित होगा।

 

 

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