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सितंबर है राष्ट्रीय पोषण माह, कुपोषित होने से कैसे बचा सकते हैं अपना शरीर, खासकर बच्चो को, जानिए डाइटीशियन मीना सेठ से पूरी जानकारी

पोषित आहार से बीमारी रहती है दूर, जानकारी के अभाव में बच्चे होते हैं बिमारी से ग्रसित, बच्चों पर दें विशेष ध्यान।

औरंगाबाद, कपिल कुमार

कहां गया है कि जब शरीर स्वस्थ व मजबूत रहता है तो किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती। कोई भी कठिन परिश्रम कर सकते हैं। शरीर स्वास्थ्य व तंदुरुस्त रहता है तो दुनिया के हर काम करना आसान हो जाता है और जब थोड़ी बहुत बीमारी से ग्रसित होते हैं तो उनके सामने तरह तरह के समस्याएं मंडराने लगता है। इसलिए शरीर को स्वास्थ्य रखना बेहद जरूरी होता है। और शरीर को तभी आप मजबूत और तंदुरुस्त रख सकते हैं जब पौष्टिक आहार के माध्यम से भोजन ग्रहण करते हैं।

अभी 1 से 30 सितंबर तक चल रहा राष्ट्रीय पोषण माह, कैसे पोषित आहार ग्रहण कर शरीर को बचा सकते हैं बीमारी से, जानिए मीना सेठ से

पटना के फोर्ड हॉस्पिटल के जाने माने डाइटिशियन मीना सेठ ने बताया कि कुपोषण से कैसे बचाव कर सकते हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी रखना बेहद जरूरी होता है। राष्ट्रीय पोषण माह पूरे देश में 1 सितंबर से 30 सितंबर तकमनाया जा रहा है। इस दौरान खासकर बच्चो पर विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए उचित पोषण आहार की बेहद जरूरी होता है। सभी लोगों को उचित पोषण मिले और स्वस्थ भारत का निर्माण हो। इसके लिए सितंबर को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जाता है।

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जन्म के बाद शिशु के पोषण के लिए क्या जरूरी है। जन्म के बाद छह माह तक सिर्फ और सिर्फ मां का ही दूध पिलाना चाहिए। मां के दूध में मौजूद पानी, प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट मिनरल्स, वसा, कैलोरी शिशु को ना सिर्फ बीमारियों से बचाते हैं। बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते तथा पाचन क्रिया भी मजबूत करते हैं। छह माह के बाद बच्चे के सतत विकास के लिए ऊपरी आहार की जरूरत पड़ती है। लेकिन इस दौरान यह ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है कि उसे कैसा आहार दें।

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दूध के अलावा ठोस और ऊपरी आहार देना शुरू कर देना चाहिए। इस दौरान शुरू किया गया बेहतर पोषण आहार शिशु को स्वस्थ, मजबूत और खुशहाल बनाता है। मसली हुई सब्जियां और फल देकर देने से बच्चे की प्रतिक्रिया जागृत होती है। साथ ही बच्चे के छह माह के होने के बाद से उसे हल्का ऊपरी आहार देना शुरू करें। शुरू में नरम खिचड़ी, दाल-चावल व हरी सब्जियां उबला हुआ आलू जैसे मसला हुआ आहार दें। 7 से 8 माह तक के बच्चों को दो कटोरी, 9 से 11 महीने के बच्चों को तीन कटोरी और 12 से 24 माह तक के बच्चों चार-पांच कटोरी अच्छी तरह से मसला हुआ आहार दें। उसके साथ ही एक चमच्च घी, दो बूंद निम्बू का जूस, दूध के साथ अखरोट का पाउडर मिलाकर दें। इससे बच्चों का दिमाग तेज होता है।

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