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यहाँ अनबोलते पशु खुलकर करते हैं बातचीत, अपनी भाषा मे सुनाती हैं दर्द, बच्चो व वृद्ध की तरह होता है पशुओं का पालन पोषण

दुर्घटना में घायल पशुओं व कसाई के हाथों बचकर आने वाले पशु यहां हंसकर करते हैं बातचीत, हजारों जानवरों का मिल रहा जीवनदान

 

कपिल कुमार, औरंगाबाद (बिहार)

गोशाला से असमाजिक तत्वों व महंत पशुओं को कर रहे चोरी, पुलिस नही कर रही कार्रवाई, महर्षि च्यवन गौ ज्ञान फाउंडेशन गौशाला देवकुंड में पूरे राज्य के हजारों पशुओं को दिया जा रहा जीवनदान

इस पशु को पेट मे घुसा था लोहे का छरिया, किसी तरह गौशाला के माध्यम से मिला नयी जीवन, अब पूरी तरह है स्वस्थ्य

 

कागज पर 50 एकड़ में दर्ज है गौशाला, अवैध कब्जा से थोड़ा जगह ही है सीमित,
सरकार से नही मिल रहा मदद

बीमार पशुओं को किया जाता है सेवा, गौशाला को बदनाम करने के लिए कुछ लोग चोरी घटना का दे रहे अंजाम

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कहा जाता है कि पशु कभी बोलते नहीं हैं, पशु अनबोलते होते हैं, लेकिन औरंगाबाद जिले में पूरे राज्यों की पशुओं की सेवा करने के उद्देश्य से खोले गए गौशाला की बात ही निराली है। यहाँ पशु खुलकर बातचीत करते हैं। अपनी भाषाओं मे दर्द भी बयाँ करती हैं। गौशाला में सेवा दे रही गौ रक्षक अपनी बच्चो व वृद्ध की तरह पशुओं को पालन पोषण करती है। पूरे राज्य के सड़कों पर होने वाले दुर्घटना में घायल पशुओं को यहां बड़े अस्पतालों जैसा इलाज किया जाता है। खासकर जो पशु कसाई के हाथों बचकर गौशाला पहुचते हैं वे पशु यहां हंसकर बातचीत करते हैं। लेकिन आये दिन गोशाला से असमाजिक तत्वों व कुछ पड़ोस के लोगो द्वारा पशुओं की चोरी कर बदनाम करने में लगे हैं। इसपर पुलिस भी कोई कार्रवाई नही कर रही है। हम बात कर रहे हैं महर्षि च्यवन गौ ज्ञान फाउंडेशन द्वारा संचालित देवकुंड गौशाला की। यहाँ पूरे राज्य के हजारों पशुओं को जीवनदान मिला है और मिल भी रहा है। खासकर बीमार पशुओं को अपने घर के सदस्य जैसे सेवा किया जाता है। लेकिन गौशाला को बदनाम करने के लिए कुछ लोग चोरी घटना का अंजाम दे रहे हैं। इस गौशाला में औरंगाबाद जिले ही नही बल्कि पूरे राज्य में हो रही पशुओं की तस्करी से बचाव को लेकर एवं बीमार पशुओं को इलाज कराने के उद्देश्य से गौ ज्ञान फाउंडेशन गौशाला खोला गया है। लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों के कारण हालात खराब हो रहा है।इस गौशाला में हजारों पशुओं की देखरेख किया जाता है। कहीं से भी बीमार पशुओं को लाकर यहां इलाज किया जाता है, और फिर उसे अपने बच्चों व वृद्ध की तरह सेवा किया जाता है। कुछ लोग दबंगई के साथ पशुओं की चोरी कर रहे हैं और दूसरी तरफ इस जमीन पर कब्जा भी करना चाहते हैं। स्थानीय पुलिस इसपर कोई कार्रवाई नही कर रही है। जिससे गौशाला कमेटी उनलोगों से तंग आकर अजीज हो चुकी है।

गौशाला कमेटी के निताशा जी, पूनम जी ने बताया कि गौ ज्ञान फाउंडेशन, देवकुंड गौशाला में, आस पास के गाँव तथा औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, अरवल, जहानाबाद, गया, नवादा और पटना जिलों से, स्थानीय पुलिस द्वारा पशु तस्करों से बचाए गए गोवंश को चारा, चिकित्सा और आश्रय प्रदान किया जाता है। इस क्षेत्र में यह एकमात्र गौशाला जहां पशुओं को सभी तरह के सुविधा प्रदान किया जाता है। पिछले 3 वर्षों से, 800 से भी अधिक बैल, सांड, बछड़े तथा बूढ़ी व बीमार गायों की सेवा हो रही है। इस गौशाला के माध्यम से 30 से भी अधिक व्यक्तियों को रोज़गार प्राप्त हो रहा है। किंतु कुछ असामाजिक तत्व अपने निजी स्वार्थ के लिए गौशाला को बदनाम करने में लगे हुए हैं। जिसमें जिले के महंत सबसे आगे हैं। समय समय पर महंत के लोग इस गौशाला से गोवंश की चोरी भी करते हुए पकड़े गए हैं।एक ओर तो महंत सरकार द्वारा निर्धारित गौचर भूमि और गौशाला की जमीन पर कब्जा करके बैठें हैं। और गौ हित के लिए उसका उपयोग नहीं करने देते है। दूसरी ओर पुलिस प्रतिदिन नए गोवंश सौंप रही है जिस कारण गौशाला में मवेशियों की आबादी बढ़ रही है। इस वजह से गौशाला में जगह का भी अभाव हो रहा है। ऊपर से दिन – रात भारी वर्षा के चलते गौशाला में बहुत कीचड़ हो गया है। इसके साथ ही गौवंश में लम्पी रोग भी तेज़ी से फैल रहा है। ऐसे कठिन समय में महंत गौशाला के पीड़ित गौवंश की मदद करने के बजाय गोचर भूमि पर कब्जा करने में जुटे हैं।
सरकारी कागज़ों पर तो गौशाला के लिए पचास एकड़ जमीन दर्ज़ है, किंतु यथार्थ में थोड़ी सी भी जगह उपलब्ध नहीं जहाँ गौवंश को शिफ्ट किया जा सके।
हाल ही में, जगह के अभाव के कारण तथा भारी वर्षा के चलते कुछ बीमार गायों की मृत्यु की आड़ लेकर महंत ने सारी हदें पार कर दीं। उसने गौशाला में भीड़ जमा करके, गौ ज्ञान फ़ाउंडेशन की महिला स्वयंसेविका पर हमला बोल दिया और अवसर का लाभ उठाते हुए गौशाला से 50 से भी अधिक गौवंश को गायब करवा दिया। जो कि केस प्रॉपर्टी थे। इस घटना से पहले भी महंत संस्था के नाम पर अवैध रूप से पैसा इकट्ठा करता रहा है।
यह अवैध गतिविधियां भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत, दंगा, बलवा, आपराधिक अतिचार, हमला, आपराधिक न्यास भंग, पशु क्रूरता, चोरी, लूट जैसे कृत्य हैं। इस वारदात में संलिप्त सभी व्यक्तियों के खिलाफ फाउंडेशन की ओर से देवकुंड थाने में मामला दर्ज करवाया गया है। किन्तु पुलिस को अनेक कंप्लेंट देने के बावजूद भी उनके नकारा रवैये की वजह से यह समस्या और भी गंभीर हो चुकी है। गुंडों के हौसले बुलंद हो गए हैं और वह खुले आम गौशाला कर्मियों को परेशान कर डराते हैं और आसानी से फरार हो जाते है। आरोपियों को पकड़ कर उचित कार्यवाही करना तो दूर, पुलिस गौशाला को सुरक्षा तक भी प्रदान नहीं कर रही है। पहले तो पुलिस रात को गौशाला की सुरक्षा के लिए फेरे भी लगाती थी किन्तु वह भी पिछले कई महीनों से बंद है।
पहली वारदात 2- 9 -2022 को गौशाला पर सामूहिक हिंसा के समय हुई जिसमें करीब 50 गौवंश को अगवा कर लिया गया। दूसरी घटना में गौशाला की स्वयं सेविका को अल्पसंख्यक बोलकर, प्रताड़ित किया गया जिसकी लिखित कंप्लेंट लेने से भी पुलिस ने साफ़ इंकार कर दिया और उल्टा महिला के खिलाफ ही केस दर्ज करके उसे डराया – धमकाया गया । तीसरी वारदात 19 – 9 -2022 को हुई, जिसमें अपराधियों ने देर रात अँधेरे का फायदा उठा कर 2 भेंसो को चुरा लिया जोकि केस प्रॉपर्टी थे। इन सभी घटनाओं में पुलिस पूरी नाकाम रही है। उन्होंने अपरिधयों के खिलाफ ना तो कोई FIR दर्ज़ की है और ना ही मामले की कोई छानबीन की।

गौशाला के रखरखाव, मवेशियों के भरण पोषण आदि से संबंधित कोई भी मदद सरकार से नहीं मिलती है। पिछले साढ़े 3 वर्षों में हम अपनी ओर से गौशाला सञ्चालन के लिए 5 करोड़ रूपए से भी अधिक खर्च कर चुके हैं। संघठन जनता की भलाई के लिए होता है ना कि उसको प्रताड़ित करने के लिए। पुलिस का कार्य भी बेगुनाह नागरिकों की रक्षा करना है,लेकिन यहाँ तो पुलिस की लापरवाही का यह आलम है कि अपराधी गौशाला में इतनी गुंडागर्दी करने के बाद भी आराम से घूम रहे हैं और पुलिस सिर्फ लकीर पीट रही है।

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