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बाल्मीकि जयंती पर विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

औरंगाबाद, कपिल कुमार

 

जिला मुख्यालय स्थित सत्येंद्र नगर मुहल्ले में अवकाश प्राप्त प्रोफ़ेसर डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह के आवास पर सोमवार को जिला हिंदी साहित्य के तत्वाधान में आदि कवि वाल्मीकि जी की जयंती समारोह धूमधाम से मनाया गया। साथ ही साथ काव्य संध्या का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने किया जबकि संचालन सुरेश विद्यार्थी ने किया । सर्वप्रथम वाल्मीकि रचित आदि महाकाव्य रामायण की मंत्रोपचार विधि से पूजन अर्चन एवं पुष्पार्पण किया गया। तत्पश्चात महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि अवकाश प्राप्त प्रो0 डा0 सी एस पांडेय, समकालीन जवाबदेही के प्रधान संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा, प्रसिद्ध ज्योतिर्विद, लेखक शिक्षक शिव नारायण सिंह एवं अन्य लोगों ने महर्षि बाल्मीकि को हर युग में अवतरित होने वाला कवि बताया। जब जब धर्म का क्षरण होने वाला होता है तो महर्षि बाल्मीकि प्रकट होकर अपने काव्य के माध्यम से धर्म की रक्षा करतें हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि महर्षि बाल्मीकि रचित रामायण सभी राम कथानको की पृष्ठभूमि है। महर्षि वाल्मीकि को जाति बंधन में नहीं बांधा जा सकता। शिवभक्त पुरुषोत्तम पाठक, शिक्षक उज्जवल रंजन, अर्जुन सिंह मुरलीधर मिश्रा, सुरेंद्र सिंह कृष्णदेव पांडेय, प्रियव्रत कुमार ने भी महर्षि बाल्मीकि को युग प्रवर्तक कवि बताया कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में काव्य संध्या का आयोजन किया गया।काव्य संध्या का सफल क्रियान्वयन विचित्र एवं रहस्यमई कवि नागेंद्र केसरी ने किया। सियासत पतित हुई भगवान के संबोधन से काव्य की शुरुआत की।आधुनिक काव्य के प्रसिद्ध कवि धनंजय जयपुरी ने छंद से परिपूर्ण कविताओं का पाठ किया तो शंभूनाथ शुक्ला की कविताएं खूब तालियां बटोरीं। शिक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह की काव्यात्मक कवित्त सब को भावविभोर कर दिया तो जनार्दन जलज ने हृदय के तार झंकृत करने वाले काव्य पाठ किया। सुरेश विद्यार्थी ने बाल्मीकि आज फिर तुम्हारी जरूरत है कविता का पाठ किया। काव्य संध्या का धन्यवाद ज्ञापन उज्जवल रंजन ने किया।

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