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विवेकानंद वीआईपी स्कूल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बाल दिवस, छात्र-छात्राओं को उपहार देकर किया गया सम्मानित, खेल कूद का भी हुआ आयोजन

पंडित जवाहर लाल नेहरू थे एक सच्चे देशभक्त,  बच्चों से था विशेष लगाव, इसलिए नाम पड़ा था चाचा नेहरू, के बच्चे कल के हैं भविष्य: निदेशक

 

औरंगाबाद, कपिल कुमार

शहर के विवेकानंद विज़न आइडियल पब्लिक स्कूल में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जयंती धूमधाम से मनाई गई। प्रार्थना सभा मे चेयरमैन मनीष वत्स, उपप्राचार्य संजीव कुमार ने नेहरू जी के तैल चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।पूरा विद्यालय परिवार नेहरू जी को पुष्पांजलि अर्पित किया।निदेशक डॉ शम्भू शरण सिंह ने पंडित नेहरू को एक दूरद्रष्टा राष्ट्र निर्माता बताया।कहा कि उनके दिखाए गए रास्तों पर चलकर ही आज हमारा देश पूरी दुनिया को नेतृत्व करने की दिशा में उत्तरोतर आगे बढ़ रहा है।उन्होंने एक मजबूत, सुदृढ़ और सुसम्पन्न राष्ट्र की नीब रखी।आज भारत का बढ़ता प्रभाव उन्हीं के पदचिह्नों का परिणाम है। नेहरू ने एक सशक्त, सुसम्पन्न और सुशिक्षित राष्ट्र का सपना देखा था,जो आज आकार ले रहा है।बच्चे उन्हें विशेष प्रिय थे, बच्चों के बीच तो नेहरू जी खुद बच्चा बन जाते थे।

चेयरमैन मनीष वत्स ने नेहरू जी के जीवन प्रसंगों से छात्रों को अवगत कराते हुए बताया कि हम कितनी भी ऊँचाई को छू ले जीवन मे सादगी कभी नही छोड़नी चाहिए।सादगी आपकी ओजस्विता में चार चाँद लगा देते हैं।हमें अपना हर काम राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर करना चाहिए।नेहरू जी एक ओजस्वी वक्ता, उच्च कोटी के लेखक, विचारक और सफल नेतृत्वकर्ता थे।जिनके नेतृत्व में भारत ने न सिर्फ आज़ादी प्राप्त की बल्कि स्वयं को पुष्पित और पल्लवित भी किया।बच्चों से उन्हें विशेष लगाव था अतः उनके जन्मदिवस को बाल दिवस के रूप में हमसब मनाते हैं।


उपप्राचार्य ने छात्रों के नेहरू जी की जीवन से अनुशासन, समय पालन और अपने काम के प्रति समर्पित रहने की सीख दी।इस अवसर पर बच्चों के बीच भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कई सह शैक्षणिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। शतरंज, रस्साकस्सी, कबड्डी, रीलेदौड, लंबी कूद, ऊँची कूद में भी बच्चों ने भाग लिया।सभी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को विद्यालय प्रबंधन द्वारा पुरस्कृत किया गया।निदेशक ने सभी खिलाड़ियों की हौसलाअफजाई की।कहा कि खेल में हार जीत का कोई महत्त्व नही है आपने कितना अनुशासन और संयम में खेला यह महत्वपूर्ण है।उन्होंने सभी को बाल दिवस की शुभकामनाएं दी।इस अवसर पर पूरा विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

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