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दिव्यांगो को सर्टिफिकेट बनवाने के लिए पिछले छह महीनों से सिर्फ मिल रहा तारीख पर तारीख, नही मिल रहा इंसाफ, किया प्रदर्शन, पहुँचे डीएम कार्यालय

सर्टिफिकेट के लिए 6 महीना से सीएस कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं दिव्यांग,

हमलोग दिव्यांग हैं इसीलिए शायद नही सुन रहे पदाधिकारी,

सीएस कार्यालय का घेराव कर किया हंगामा, डीएम को सौंपा आवेदन

औरंगाबाद, कपिल कुमार

आम आदमी की थोड़ा बहुत परेशानी हो तो झेल लेता है। अगर किसी का एक हाथ ना हो एक पैर ना हो (दिव्यांग हो) हो भी तो चलने लायक नहीं हो, किसी के कंधे पर सवार होकर तो किसी के गोद में बैठकर सरकारी कार्यालय पहुँचे और उनका दिन भर रुकने के बाद भी काम न हो तो आप क्या समझेंगे। दिव्यांगों को ना तो कोई अधिकारी ना कोई पदाधिकारी सुदी लेते हैं और न ही उनलोगों को कोई आश्वासन मिलता है। सुबह 8 बजे से भूखे प्यासे इस लू भरी तपिस में सरकारी कार्यालय के समीप बैठे रहे और फिर बिना काम हुए अचानक शाम ढलते ही उन्हें मजबूरन घर जाना पड़े तो उसके दिल और दिमाग पर क्या बीतेगा, जरा आप ही बताईये। एक ऐसा ही मामला मंगलवार को सदर अस्पताल स्थित सिविल सर्जन कार्यालय का है। मंगलवार की सुबह होते ही सैकड़ों की संख्या में दिव्यांग सर्टिफिकेट हेतु मेडिकल जांच के लिए पहुंचते हैं। घण्टो बीतने के बाद कार्यालय में बैठे कर्मियों द्वारा यह कहा जाता है कि थोड़ी देर और रुकिए डॉक्टर साहब आ रहे हैं। इसी आश्वासन के साथ रुकते रुकते जब शाम के 5:00 बज गए तो भी डॉक्टर साहब नहीं पहुंचे। अंत में भूखे प्यासे दिव्यांगों ने अपनी गुस्सा धीरे-धीरे बाहर निकालना शुरू किया। जब मीडिया कर्मी पहुंचे तो तमाम दिव्यांगों ने बताया कि वह अपने गांव से 50 से 70 किलोमीटर दूरी तय कर सदर अस्पताल दिव्यांग सर्टिफिकेट के लिए पहुंचे हैं। सिविल सर्जन द्वारा हर महीने 15 व 30 तारीख को डेट दिया जाता है इस बार 17 तारीख को डेट मिला था। वह भी फेल कर गया। इस दौरान खैरा मिर्जा से पहुंचे नंदलाल ठाकुर, गैनी की रीना देवी, चिल्हकी बीघा से रमेश मेहता, तमसी से उमेश प्रजापति, सिंदुरिया से नरेश राम, हसपुरा से सुरेश सिंह जो दोनों पैर से विकलांग हैं। किशुनपुर से शंकर कुमार, केताकी से सूरज कुमार, रतनुवा से पूनम देवी, गठौली से प्रतिमा कुमारी, दूधैला से रोशन कुमार, गईनी से रानी कुमारी, पोखराहा से चंद्रमोनी कुमारी, परसी से संजय कुमार, तमशी से सागर कुमार ने बताया कि हम लोग सुबह 8:00 बजे सिविल सर्जन कार्यालय पहुंच गए थे। जब दोपहर 12:00 बज गए तो कुछ कर्मी ने बताया कि डॉक्टर साहब थोड़ी देर में आएंगे तो सभी का चेकअप करेंगे। समय देखते-देखते जब 5:00 बज गया और कोई डॉक्टर नहीं आए तो हम लोग चिंतित हो गए। आखिर हम लोग दिव्यांग हैं इसीलिए हम लोग को कोई नहीं सुन रहा। यही नहीं दिव्यांगों का गुस्सा फूट पड़ा और फिर किया था वह हल्ला हंगामा मचाना शुरू कर दिया सिविल सर्जन कार्यालय के समीप नारेबाजी करते हुए कहा कि दिव्यांगों का शोषण करना बंद करें सिविल सर्जन मुर्दाबाद डीएम साहब इंसाफ दिलाएं के नारे लगाते हुए अपनी बातों को फरमाया इसके बाद डीएम कार्यालय पहुंचे जहां आवेदन के माध्यम से अपनी इंसाफ की भीख मांगी। इधर दिव्यांगों ने कहा कि हम लोग कहीं प्राइवेट तो कहीं सरकारी से सेक्टरों में काम करते हैं जब अस्पताल प्रबंधन द्वारा तिथि दी जाती है तभी हम लोग छुट्टियां लेकर आते हैं यह प्रॉब्लम पिछले 6 महीनों से चलता आ रहा है फिर मिल रही है तो तारीख पर तारीख । इस संबंध में सिविल सर्जन कुमार वीरेंद्र प्रताप ने बताया कि चिकित्सकों की घोर कमी थी मंगलवार को तिथि तय की गई थी कि 17 मई को दिव्यांगों को सर्टिफिकेट बनवाने हेतु मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया था लेकिन मुख्य चिकित्सा के अभाव में दिव्यांगों का थोड़ा परेशानी हुआ है अगले तिथि निर्धारित कर सभी दिव्यांगों को मेडिकल चेकअप कर सर्टिफिकेट उपलब्ध करा दिया जाएगा।

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