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पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद के नवनिर्मित पांच मंजिले भवन का किया उद्घाटन

चीफ जस्टिस की अधिवक्ताओं से अपील,अपने ही कोर्ट को बनाएं सुप्रीम कोर्ट, ताकि पीड़ित पक्ष को कहीं और भटकना न पड़े

 अनिल कुमार राव की रिपोर्ट

औरंगाबाद। जजों के लिए सबसे जरूरी है कि वह पारदर्शिता के साथ न्याय करें। हमारे उपर समाज की निगाहें टिकी हुई हैं। हम समाज के प्रति जिम्मेदार हैं। हमारा प्रत्येक कार्य, वचन एवं व्यवहार लोगों में न्याय प्रक्रिया के प्रति विश्वास दृढ़ करनेवाला होना चाहिए।यह उक्त बातें लोगों को संबोधित करते हुए पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल ने कही हैं। दरअसल वे व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद परिसर में नव निर्मित पांच मंजिला भवन के ई-इनॉग्रेशन कार्यक्रम में पहुंचे थे।

 

इस अवसर पर विधिवत रूप से दीप प्रज्वलित कर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल, जिला जज मनोज कुमार तिवारी समेत अन्य न्यायिक पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से नवनिर्मित न्यायालय भवन का उद्घाटन किया। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यू कोर्ट बिल्डिंग न्यायिक कार्य के लिए अब मुख्य भवन होगा। व्यवहार न्यायालय में कार्यरत न्यायालय को यथासंभव इसमें स्थानांतरित किया जाएगा ताकि एक ही जगह से सुगमता पूर्वक मामलों का निपटारा किया जा सके। यह अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण हैं।

पांच मंजिले व्यवहार न्यायालय के उद्घाटन से पूर्व चीफ जस्टिस ने पालना घर का भी उद्घाटन कर उसे भी न्यायालय को समर्पित किया।इस दौरान जिला जज मनोज कुमार तिवारी के साथ साथ न्यायिक पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। उद्घाटन सत्र की विधिवत शुरू राष्ट्रीय गान से की गए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस ने सबसे पहले बिहार की धरती यहां के लोगों, यहां की संस्कृति को नमन किया और न्यायाधीशों को अपने संबोधन के माध्यम से यह अपील की कि न्याय प्रक्रिया को सरल एवं सहज बनाए और वादियों को न्याय दे।

जिससे उन्हें संतुष्टि मिले।चीफ जस्टिस ने अधिवक्ताओं से भी अपील की कि अपने ही कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट बना दें और न्यायाधीशों पर यही न्याय देने का दबाव बनाएं ताकि किसान, मजदूर एवं अत्यंत गरीब तबके के लोग यहां के अलावा अन्य कही न जाए।चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि ऐसे लोगों को अपने कोर्ट में न्याय नहीं मिलेगा तो कहां से हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट का खर्च वहां कर पाएंगे और उनकी पूरी जिंदगी इसी में गुजर जाएगी।

ई-इनॉग्रेशन के अवसर पर जिला पदाधिकारी सौरभ जोरवाल, पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव प्रणव शंकर समेत कई अधिवक्ता समेत न्यायिक पदाधिकारी व कर्मी मौजूद रहे।

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