राष्ट्रीय

शहरों गांवों और राज्यों के नाम बदलने का अभियान फिर होगा चालू

अनामी शरण बबल(वरिष्ठ पत्रकार)

नयी दिल्ली। उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद और फैजाबाद जिला का जिस तेजी के साथ नाम बदलकर प्रयागराज  और अयोध्या कर दिया गया है। नाम बदलने में सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तेजी से पूरा देश अचंभित रह गया। मगर पिछले तीन माह से शहरों गांवों  जिलों प्रांतों के नामों को बदला नहीं गया है। अलबत्ता साल 2018 में सरकार ने 30 से अधिक शहरों गांवों कस्बों के नाम बदले हैं। आजादी के 72 साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई एक साल में इतने नाम कभी बदले ‌ गए हों। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास करीब एक सौ शहरों कस्बों जिलों प्रांतों के नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। जिसे मौक़ा नजाकत सुअवसर आदि के हिसाब से नए नाम से पुराने नामों की पहचान बदलने की कारवाई की जाएगी।

 

 

अलबत्ता पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वर्तमान पश्चिम बंगाल नाम को बदलकर  केवल बंगाल करने के अनुरोध और सिफारिश को केंद्र सरकार ने  गह‌ मंत्रालयो और विदेश मंत्रालय की बांग्लादेश नाम की साम्यता के कारण इस अनुरोध को नकार दिया। इसके बावजूद चुनावी मौसम में एक बार फिर नाम बदलने का मौसम आरंभ होगा।गिरीह मंत्रालय की ओर से ज्यादातर जगहों के नाम बदलने की मंजूरी मिल चुकी है। आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले के राजामुंदरी को  राजा महेन्द्रवरम, उड़ीसा के भद्रक जिले आउटर व्हीलर को एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड केरल के मललपुरा जिले के एरईकवओड के एरीकोड हरियाणा के जींद जिले के पिंडारी को पांडु पिंडारी और रोहतक के गढ़ी सांपला को सर छोटूराम नगर, राजस्थान के नागौर जिले के खाटू कलां गांव  को बड़ी खाटू  सांगली जिले के लांड गवाडी गांव को नरसिंह गांव करना मंजूर किया गया है।

 

 

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के महगवां छक्का गांव को  महगवां सरकार  महगवां तिरिया के महगवां घाट यूपी के मुजफ्फरनगर का नाम लक्ष्मीपुर  मुजफ्फरनगर के ही शुक्रताल बांगर को सुखतीर्थ बांगर कर दिया गया है। अलबत्ता पश्चिम बंगाल को बंगाल    नामकरण करने की  तरह ही नागालैंड में दीमापुर के कुछेरी गांव के नाम बदलने की प्रक्रिया को मंत्रालय ने नकार दिया है।गिरीह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले रेल विभाग डाक विभाग सर्वे आफ इंडिया से अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने के बाद ही नाम बदलने के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मंजूरी दी जाती है।  इन संगठनों को अपने दस्तावेज में यह देखना होता है कि प्रस्तावित नाम या शहर पहले से तो मौजूद नहीं है?  आगरा मेरठ सहारनपुर अहमदाबाद बड़ौदा आदि का नाम भी लाईन में है।

 

 

जबकि बिहार के औरंगाबाद जिले के नाम को बदलकर देव करने का जनांदोलन अभी तक कोई  आकार नहीं ले पाया है। सोशल मीडिया पर जिला के नाम बदलने का मुहिम गरमागरम रहने के बाद भी अभी इसको एक सही लीडर की तरह काम करने वाले सही नेतृत्व की जरूरत है। गौरतलब है कि किसी भी नाम को  बदलने के लिए बहुमत से संसद के जरिए संविधान में बदलाव करना होता है। गांव और शहरों के नाम परिवर्तन के लिए एक्जीक्यूटिव आर्डर जारी करनी होता है। तमाम शहरों कस्बों गांवों के नाम के बदलाव  को लोकसभा चुनाव से पहले लागू होने जाने की पूरी संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

इसे भी पढ़ें

Back to top button

You cannot copy content of this page