विचार

ऐसे थे कर्पूरी ठाकुर

राकेश कुमार

आलेख। छात्र आंदोलन(जेपी आंदोलन) के बाद केन्द्र में श्री मोरारजी भाई देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी थी. यह बात सन् उन्नीस सै सतहतर की है.केन्द्र में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद जेपी के पूर्व की घोषणा के अनुसार राज्यों में भी विधान सभा के चुनाव संपन्न हुए थे. जैसा कि तब प्रतिष्ठित दैनिक आज के साक्षात्कार में पत्रकार सुरेन्द्र किशोर को जेपी ने बताया था, “अगर केन्द्र में हमारी सरकार(जनता पार्टी)बनती है, तो राज्यों की विधान सभाओं को भंग कर चुनाव करवाए जाएंगे.”

 

बिहार विधान सभा के चुनाव में जनता पार्टी को बहुमत हासिल हुआ और श्री कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में सरकार बनी. जेपी की जीवनी “लोकराज के लोकनायक” के लेखन के क्रम में गया जिले के कई ग्रामीण इलाकों में घूमने का मौका मिला. इसी क्रम में नाई जाति के कुछ बुजुर्ग लोगों ने कर्पूरी ठाकुर के बारे में संस्मरण साझा करते हुए बताया कि कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्री बनने के बाद हमलोग रोजगार मांगने पटना उनके सरकारी आवास पहुंचे और उनकी जाति के होने की बात बतायी.

 

 

कर्पूरी जी ने रात्रि विश्राम की जगह आवास में दी. अगले दिन शाम में कैंची-छुरा खरीदवा कर हमलोगों को थमा दिया और ईमानदारी से श्रम कर जीविकोपार्जन करने की नसीहत के साथ विदा कर दिया.
  कर्पूरी जी को जन्मजयंती पर शत शत नमन.
          “…….वीर खींचकर ही रहते हैं इतिहासों में लीक”

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