सम-सामयिक

माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी से अपील

राकेश कुमार (लेखक-लोकराज के लोक नायक)

समसामयिक। शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है जो धीरे-धीरे मौत के मुँह में पहुँचा देती है किन्तु जहरीली शराब का सेवन तुरंत मौत के मुँह में धकेल देती है.जहरीली शराब के सेवन से औरंगाबाद में काफी लोगों की मौत विगत सप्ताह में हुई है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक खिरियावां पंचायत, मदनपुर में एक दर्जन के करीब मौतें हुई हैं. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि नक्सली सरगना संदीप की भी मौत जहरीली शराब के सेवन से हुई है.

क्या हो आगे की राह

1. लोग स्वेच्छा से शराब का सेवन छोड़ दें ,अन्यथा आपकी कीमती जान चली जाएगी.

2. आपकी जान चली जाने के बाद परिवार अनाथ व बेसहारा हो जाएगा.

3. पुलिस को ‘शराब मार्ग’ और शराब कारोबारियों पर नज़र रखनी होगी और आसूचना तंत्र का विकास व जाल फैलाकर सख्ती से निपटना होगा.

4. झारखंड के सीमावर्ती इलाके और बिहार में स्थानीय स्तर पर शराब बनाने के कारखानों पर नियंत्रण रखना होगा.

5. वैसे बिहार सरकार के तमाम सख्ती के बावजूद भी मद्य निषेध अमल में नहीं आ पा रहा है. बिहार में शराब भगवान की तरह उपस्थित है जो दिखता कहीं नहीं है,परंतु मिलता सब जगह है. अगर ऐसा नहीं होता तो जहरीली शराब के सेवन से इतने लोग नहीं मरते.

6. बिहार सरकार को मेरी सलाह है कि मद्य निषेध कानून पर पुनर्विचार करने की जरूरत आ पड़ी है क्योंकि इससे तिहरा घाटा बिहार को झेलना पड़ रहा है. एकतरफ ,लोग अवैध व्यापार वाली जहरीली शराब से जान गंवा रहे हैं. दूसरी तरफ बिहार में राजस्व का भी नुकसान हो रहा है.तीसरी तरफ , बिना पूंजी या कम पूंजी लगाकर शराब के धंधे में उतरे लोगों का समूह देखते-देखते धनाढ़्य व बेलगाम हो रहा है जो भविष्य में कानून-व्यवस्था समेत कई पक्षों के लिए सरकार को चुनौती पेश करेगा.

कैसे पहल करे सरकार

1. प्रखंड मुख्यालय, अनुमंडल मुख्यालय और जिला मुख्यालय में मात्र दो-दो शराब के ठेके सरकार की निगरानी व नियंत्रण में खोले जाएँ और आधार नंबर की डाटा इंट्री के बाद खरीददारों को सीमित मात्रा में शराब बेची जाए.

2. प्राप्त डाटा के आधार पर सरकार डॉक्टर एवं काउंसलर की अगुवायी वाली टीम से शराब खरीददारों का माह में एक बार काउंसलिंग करवाने व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास करे.

3. शराब कानून के लागू होने के प्रारंभिक दिनों पकड़े गये शराबियों की काउंसलिंग(नशा मुक्ति केन्द्र) के लिए अनुमंडल और जिला स्तर के अस्पतालों में एसी युक्त काउंसिलिंग वार्ड बनाये गये थे. अब ये कार्यरत हैं या नहीं; मुझे इसकी जानकारी नहीं है. अगर आपको हो तो जरूर बताइएगा?

4. उपरोक्त नशा मुक्ति केन्द्रों का सहारा ठेके से प्राप्त (आधार कार्ड एंट्री) डाटा के बाद किया जाना चाहिए.

 

जेपी के सपनों के बिहार में सरकार व सत्ता के संचालक उनके करीबी अनुनायी हैं. मैं जेपी के विचारों व सिद्धांतों का प्रबल समर्थक हूँ और जयप्रकाश नारायण जी(जेपी) की जीवनी (पुस्तक: लोकराज के लोकनायक (#lokraj_ke_loknayak) का लेखक भी हूँ. इस वजह से मेरा भी फर्ज बनता है कि जेपी के परम अनुनायी माननीय श्री नीतीश कुमार जी की अगुवाई वाली सरकार को सलाह दे सकूँ.जेपी ने अपने जीवन में फैसले व विचारों मे योग्यता, परिस्थिति की मांग व तार्किकता के आधार परिवर्तन का सदैव स्वागत किया था.

 

जेपी को भारतीय राजनीति में वैचारिक अस्पृश्यता को अंत करने के पहल के लिए जाना जाता है यानी वामपंथी या दक्षिणापंथियों के तार्किक व प्रासंगिक विचारों का सदैव स्वागत किया जाता रहा जेपी द्वारा..#lokraj_ke_loknayak
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