संस्मरण

डॉ प्रत्यूष रंजन एक बेहतर नेत्र सर्जन के साथ साथ बेहतर इंसान

राकेश कुमार(लेखक-लोकराज के लोक नायक)

संस्मरण। डॉ प्रत्यूष रंजन जी आयु में मेरे समकक्ष हैं किंतु रिश्ते में भतीजे लगते है. वे मेरे अभिभावक व अग्रज औरंगाबाद के ख्यातिलब्ध नेत्र चिकित्सक स्मृतिशेष डॉ राजीव रंजन वर्मा जी के सुपुत्र हैं डॉ प्रत्यूष रंजन जी; जो संप्रति काशी की धरती पर नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में अपने पिताजी की लब्धियों व ख्यातियों की परंपरा को आगे बढ़ाने में जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं.काशी के दो दिवसीय प्रवास के दौरान डॉ प्रत्यूष रंजन जी से मिलने का सौभाग्य हासिल हुआ.


डॉक्टर प्रत्यूष की व्यवहार कुशलता, नेत्र रोगियों के उपचार की कुशलता और रोगियों का डॉक्टर साहेब के प्रति विश्वास व फीडबैक सुनकर मुझे अति प्रसन्नता हुई.वैसे सामान्य डॉक्टरवृंद की श्रृंखला से अलग डॉक्टर प्रत्यूष में विज्ञान और आध्यात्म का अद्भूत संगम मैंने बातचीत में महसूस किया. सौंदर्यबोध का चरम भी मैंने डॉ प्रत्यूष में पाया.

उनके सौंदर्यबोध की झलकियों को उनकी फोटोग्राफी में आप भी महसूस कर सकते हैं.काशी की धरती पर डॉ प्रत्यूष का आतिथ्य पाकर मैं अभिभूत हूँ. वैसे ,औरंगाबाद में स्मृतिशेष अग्रज डॉ राजीव रंजन वर्मा जी के आँख अस्पताल में ईलाज हेतु जाने पर पहले भोजन का आनंद के बाद ही डॉक्टर साहेब मेरी आँखों का ईलाज किया करते थे. काशी में प्रत्यूष जी का आतिथ्य भाव मेरे अग्रज की अगली कड़ी का सुखद अहसास कराया.


आखिर, डॉक्टर राजीव रंजन वर्मा जी द्वारा औरंगाबाद में स्थापित इतने बड़े संस्थान व स्थापना को छोड़कर डॉ प्रत्यूष ने काशी में सेवा देने का फैसला क्यों लिया? स्मृतिशेष अग्रज डॉ राजीव रंजन वर्मा जी ने भी अपनी जिंदगी में ही औरंगाबाद को छोड़कर काशी की सेवा में स्वयं को समर्पित करने का फैसला क्यों लिया था? इन जानकारियों के लिए अगले पोस्ट का इंतजार करना होगा.

Back to top button

You cannot copy content of this page